Friday, August 17, 2018

ग्राउंड रिपोर्ट: 'दलित बहू स्वीकार पर दलित को बेटी नहीं देंगे'

उनकी छोरी थी, मार दी..कोई जुल्म नहीं करया. मार दी ते बढ़िया करया. पांच-छह और ऐसा कर दें तो छोरियां डरण लाग जांगी, भाजेंगी नहीं."
ममता की पड़ोस की बुज़ुर्ग महिला मुझसे ये बातें कह रहीं थी. वही महिला जो ममता से शायद रोज़ मिलती होंगी. वही महिला जिसने बचपन से ममता को बड़े होते देखा.
ममता वही लड़की है जिसे हरियाणा के रोहतक में दो बाइक सवारों ने लघु सचिवालय के सामने आठ अगस्त को दिन-दहाड़े गोली मार दी थी. इस हत्या के आरोप में ममता के माता-पिता पुलिस हिरासत में हैं. मंगलवार (14 अगस्त) को उसके रिश्ते के एक भाई और दोनों शूटर्स को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया.
लेकिन मामला इतना ही नहीं है और इसलिए यहां खत्म भी नहीं हो जाता. सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों को ऐतराज़ रहा कि लड़की की जाति न लिखी जाए. कई लोग कहते रहे कि लड़के ने लड़की को बहलाया-फ़ुसलाया. कई उनकी उम्र के अंतर पर भी ज़ोर देते रहे. लेकिन ऐसे लोग कम नहीं हैं जो साफ़ कह रहे हैं कि ये हत्या जायज़ है.
ममता को उसके माता-पिता ने अपने रिश्तेदारों से गोद लिया था जब वह एक साल की थी. उसे प्यार था सुमिन से जो उन्हीं के यहां किराये के कमरे पर रहता था.
ममता एक जाट परिवार से थीं जो हरियाणा में एक अगड़ी जाति मानी जाती है. वहीं सुमिन वाल्मिकी जाति से है जो एक अनुसूचित जाति है.
पुलिस में दर्ज एफ़आईआर के मुताबिक ममता 2017 में अपने प्रेमी सुमिन के साथ घर से चली गई और दोनों ने आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली. तब सुमिन की उम्र 26 साल थी और ममता के पिता के आरोप के मुताबिक तब ममता की उम्र 17 साल थी.
दोनों ने शादी करते ही हाई कोर्ट में अपनी सुरक्षा के लिए याचिका लगाई. लेकिन ममता के पिता के आरोप के बाद पुलिस ने पाया कि ममता ने अपने आधार कार्ड में गड़बड़ी की है. पुलिस ने जालसाज़ी के आरोप में सुमिन और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट ने ममता को करनाल शहर के नारी निकेतन भेज दिया.
पिछले सात महीनों से सुमिन के साथ-साथ उसके पिता भी इसी जालसाज़ी के आरोप में जेल में हैं. इस बीच ममता 18 साल की हो गई और सुमिन के साथ जीवन बिताने के फ़ैसले पर अड़ी रही.
आठ अगस्त को सुमिन पर लगे मुकदमे की तारीख़ पर ममता दो पुलिसकर्मियों के साथ रोहतक कोर्ट आई थी. जब वो बाहर निकली तो दो बाइकसवारों ने उस पर गोलियां चला दीं. उसके साथ आए सब-इंस्पेक्टर की भी मौत हो गई.
पुलिस ने तुरंत उसके माता-पिता और जन्म देने वाले माता-पिता को कथित 'ऑनर किलिंग' के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया. वैसे जब इस केस से जुड़े लोगों से बात हुई तो मामला 'कथित' नहीं लगा.
श्याम कॉलोनी में ममता का बड़ा सा घर सुनसान पड़ा था. दरवाज़ा खटखटाने पर उसकी भाभी बाहर आई. उन्हें अपना परिचय दिया तो वो बिना कुछ कहे अंदर चली गईं. उनके बच्चे ने कहा कि हमको बात नहीं करनी. ड़ोस में बात करने की कोशिश की तो एक बुज़ुर्ग महिला ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं पता. जब पुलिस आई, तभी पता चला कि कुछ हुआ है. गली में दो घर छोड़ कर रहने वाली ये महिला कह रही थीं कि वो अभियुक्त मां-बाप का पूरा नाम भी नहीं जानतीं.
तभी एक और महिला वहां आईं और मुझे ममता और उसके परिवार के बारे में बताने लगीं. उन्होंने बताया कि वो पहले ममता के माता-पिता के साथ कोर्ट भी जा चुकीं हैं. बातों-बातों में उनके मुंह से निकल गया कि पिछले साल ममता का रिश्ता हो रहा था और रस्म के लिए लोग आने वाले थे.
वो बोलीं, "जिसको बट्टा लगता है, उनकी खाट खड़ी होती है. उनका कलेजा फटता है. छोटी बात नहीं है. मारना मजबूरी हो जाती है. मेरी लड़की करती ऐसा तो मैं भी मार देती."
जब मैंने उनसे पूछा कि शादी तो हो ही गई थी, कथित बट्टा तो लग ही गया था तो फिर मारने से हासिल क्या हुआ तो उन्होंने कहा कि 'अगर वो वाल्मीकि लड़का हमारी गली में उसको लेकर घूमने लग जाता तो?'

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